लोक आस्था का महापर्व छठ गुरुवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो गया

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@विनोद कुमार

सिकन्दरपुर, बलियाः लोक आस्था का महापर्व छठ गुरुवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो गया। छठ पर्व के चौथे और अंतिम दिन व्रती और श्रद्धालु अपने परिजनों के साथ सुबह विभिन्न नदी घाटों और तालाबों के किनारे पहुंचे। उन्होंने पानी में खड़े होकर उगते सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया। नहाय-खाय के साथ शुरू हुए लोक आस्था के इस पर्व के दूसरे दिन व्रतियों के सूर्यास्त होने पर खरना के तहत रोटी एवं खीर का भोग लगाये जाने के बाद उनके द्वारा रखा गया 36 घंटे का निर्जला उपवास बुधवार की शाम डूबते हुए सूर्य एवं गुरुवार की सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पारण (भोजन) के साथ संपन्न हो गया। 


आखिरी दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विधान है। इसी के साथ व्रती घाट पर ही पूजा के बाद प्रसाद खाकर अपना व्रत खोलते हैं।  नहाय खाय के साथ शुरू हुआ ये पर्व सप्तमी को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही समाप्त हुआ। सुबह घुटने तक पानी में खड़े होकर व्रतधारियों ने सूप, बांस की डलिया में मौसमी फल, गन्ना सहित पूजन सामाग्री औऱ गाय के दूध से भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और सुख समृद्धि की कामना की।



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