अग्निदेव ने मचाया तांडव, कई परिवार हुए बेघर



रिपोर्ट: विनोद कुमार

सिकंदरपुर (बलिया)। चिलचिलाती  धूप व उमस भरी गर्मी के बीच अग्निदेव ने भी अपना तांडव दिखाना शुरू कर दिया है। सिकंदरपुर थाना क्षेत्र के खरीद गांव के राजभर बस्ती में मंगलवार की दोपहर अज्ञात कारणों से लगी आग में कुल 14 परिवारों की लगभग दो दर्जन रिहायशी झोपड़ियां जलकर राख हो गई। आगलगी की इस घटना में घर गृहस्थी के सामान समेत नकदी, एक मोटरसाइकिल, साईकिल आदि जलकर राख हो गया। इस दौरान आग की चपेट में आकर एक बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से झुलस गई, जिसका इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंदरपुर में चल रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दोपहर को राजा देवी पत्नी राजनाथ राजभर (50 वर्ष) अपने झोपड़ी में रोजमर्रा का काम कर रही थी। इसी बीच अचानक अज्ञात कारणों से आग लग गई, जिससे रिहायशी झोपड़ी धू-धू करके जलने लगी। राजा देवी कुछ समझ पाती इसके पहले ही आग ने झोपड़ी को पूरी तरह से अपने आगोश में ले लिया। 


इस दौरान झोपड़ी में रखें गैस सिलेंडर मे भी आग लग गई तथा धमाके के साथ सिलेंडर फट गया, जिसमें राजा देवी गंभीर रूप से झुलस गई। देखते ही देखते आग ने आसपास के लगभग दो दर्जन झोपड़ियों को अपने चपेट में ले लिया। आग इतनी भयावह थी कि पीड़ित परिवारों का कुछ भी नहीं बच सका सब कुछ जलकर राख हो चुका था। इस आगलगी में हंसनाथ पुत्र जंगली, राजेन्द्र पुत्र जंगली, धर्मदेव सिंह पुत्र सज्जन सिंह, शिवकुमार पुत्र राजेन्द्र, केदार राजभर पुत्र खुदी राजभर, भोला राजभर पुत्र खुदी राजभर, नन्दलाल पुत्र पारस, स्वामीनाथ पुत्र रामचीज, रामाशंकर पुत्र स्व मिठाई, नागेंद्र पुत्र रामाशंकर, नारायण पुत्र रामाशंकर, राजबली पुत्र मटर व रामदरश पुत्र मिठाई की झोपड़ियां जल गई। इस आगलगी मे 6 बकरियां, दो मोटरसाइकिल, 9 साइकिल, 20 बोरी सिमेन्ट व नकदी जलकर खाक हो गया। घटना की सूचना पर पहुंची फायर बिग्रेड की टीम ने भी ग्रामीणों की मदद से किसी तरह घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। वहीं घटना की जानकारी होने के बाद तहसील प्रशासन द्वारा तहसीलदार राम नारायण वर्मा, कानूनगो मनोज सिंह, क्षेत्रीय लेखपाल मनोज कुमार यादव व रंजीत कुमार ने मौके का मुआयना कर हर संभव सरकारी मदद का आश्वासन पीड़ितों को दिया।

तीन बेटियों की होनी थी शादी पर आग ने फेरा सपनों पर पानी-

पीड़ित राजनाथ राजभर, रामाशंकर व नागेन्द्र के परिवार मे आगामी महीनों मे बेटी की शादी व विदाई का दिन रखा गया था। लेकिन इस आग ने मानो तीनों परिवार के सपनों पर पानी फेर दिया हो। दिन रात एक कर राजनाथ राजभर ने अपने बिटिया की शादी के लिए एक एक जरूरी सामान जुटाया था, जो इस आगलगी में जलकर नष्ट हो गया। इन तीनों परिवारों पर दुखों का ऐसा पहाड़ टूट पड़ा है कि रोने पर आंखों से आंसू भी नहीं निकल रहे। मानो ऐसा लग रहा है की आग ने इनकी आंखों के आंसू भी सूखा दिए हैं।


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